TAKE BACK EIA 2020; ONLY A PROGRESSIVE LAW ON PROTECTION OF ENVIRONMENT CAN HELP US

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If we are unable to Save the Environment Impact Assesment (EIA) and make it stronger, We will be blamed for the loss to nature and livelihoods.

Description:

The EIA notification is important for environmental protection, public health and workers safety. It is appalling that the Ministry has proposed to dilute the notification and seek public comments in the midst of the COVID 19 emergency.

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TAKE BACK EIA 2020; ONLY A PROGRESSIVE LAW ON PROTECTION OF ENVIRONMENT CAN HELP US




Shri Prakash Javadekar
Minister of Environment, Forests and Climate Change
Indira Paryavaran Bhawan
Jor Bagh, New Delhi
Since I don't follow the MoEF website or press releases minutely, I missed the notification. It's only after recent media reports about lakhs of mails being sent to the ministry that I realized about the issue. Please accept my mail and thus the objection as follows.
We, the people of India, reject this draft EIA 2020 as a potential law of this country for the reasons listed below:
The draft does not acknowledge the best practices in EIA from across the world. Many countries have EIAs that are implemented at the sectoral (power or transport), strategic (energy transition) and crosscutting (health and biodiversity) scale for greater effectiveness and better environmental governance. Your draft is regressive because it aims at approving projects more than assessing them. This kind of law is the reason why India remains unprogressive.
It is unacceptable that we, the people of this country, are not allowed to speak about the projects that are imposed on our neighbourhoods, our coasts and forests.The draft EIA 2020 proposed by the Ministry clearly reflects the fear of public participation in the central government. The draft gives impunity to so many projects from public hearings that it makes us think if these projects are for the good of a select few.
The Covid pandemic lockdown has shown us how unequal our society is. The poorest people of our country and the communities that live in forest areas, coastal regions and the mountains, rely on environmental resources to survive. There are enough studies to show that nature thrives only when environmental communities are safe and prosperous. We demand that the government must draft laws that enable marginalised communities to prosper and be able to conduct practices that sustain their livelihoods. The government must do away with EIA dilutions that entrust our valuable natural resources to private industries.
The central government has done so little to combat climate change, environmental degradation and biodiversity loss even after the responsibility bestowed upon us by the Paris Climate Change Agreement. If we do not change our approach to the environment, the future generations of Indiawill suffer the most. This government, which is mostly made up of seniors, may not foresee the next few decades while planning, but as parents and young people, we do. Therefore we are morally bound to demand the Ministry to withdraw the EIA 2020 and replace it with a progressive law that promotes sustainability and combats climate change.
The covid pandemic has taught the world a very important lesson. We must focus on the long term health of people rather than making short term environmentally downgraded decisions. We demand that the central government and the environment ministry stop ignoring the voices from across the country and fulfill our educated demands. The world has already changed forever. It's high time we adapt to the rules.

EIA अधिसूचना 2020 [F.N.2-50/2018/IA.III] का मसौदा वापस ले लीजिये और कोविड -2019 के प्रकाश में सार्वजनिक टिप्पणियों की प्रक्रिया को स्थगित करें





C.K.Mishra
Secretary
Ministry of Environment, Forests and Climate Change
Indira Paryavaran Bhawan
Jor Bagh, New Delhi
माननीय श्री मिश्रा,
यह पत्र ईआईए अधिसूचना 2020 के मसौदे के संदर्भ में है जो 12.03.2020 को पर्यावरण मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया था। इस मसौदे पर 60 दिनों के अंदर जनता की राय मांगी गई थी। हम चिंतित हैं कि यह मसौदा अधिसूचना एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट की पृष्ठभूमि के खिलाफ जारी की गई थी। जैसा कि आप जानते हैं, देश के अधिकांश हिस्सों में तालाबंदी चल रही है और सार्वजनिक स्थानों पर आवाजाही पर सख्त प्रतिबंध हैं। ज्यादातर कार्यालय बंद हैं और कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं। यह प्रतिबंध अनिश्चित हो सकते हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि सार्वजनिक जीवन और काम कब शुरू होंगे।
इस वैश्विक महामारी के दीर्घकालिक सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक परिणाम क्या होंगे यह अभी तक निर्धारित नहीं किया गया है। ईआईए अधिसूचना एक महत्वपूर्ण नियम है जिसके द्वारा औद्योगिक और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में भूमि का उपयोग परिवर्तन, जल अपूर्तन, वनों की कटाई, प्रदूषण, अपशिष्ट और समर्द्ध जल प्रबंधन पर प्रभाव का अध्ययन कर के विकासात्मक निर्णय किया जाएगा। इस कानून में होने वाले किसी भी बदलाव से लोगों की जीवित और कामकाजी परिस्थितियों एवं पर्यावरण पर सीधा असर पड़ता है।
इसलिए, यह आवश्यक है कि सरकार ईआईए अधिसूचना के डिजा़इन और कार्यान्वयन से प्रभावित लोगों के लिए उचित और पर्याप्त अवसर प्रदान करे क्योंकि वर्तमान स्वास्थ्य आपात स्थिति में सार्वजनिक आँदोलनों की मनाही, सामाजिक दूरी और दैनिक जीवन में चुनौतियाँ शामिल हैं जो प्रस्तावित संशोधनों के परिणामों को समझने और चर्चा करने के अवसरों में बाधा उत्पन्न करती हैं। ऐसे में इन प्रतिबंधों से उन समुदायों को अधिसूचना के बारे में जानकारी देना असंभव हो जाता है जिन्हें अधिसूचना और उसके प्रभाव को जानना आवश्यक है।
इसलिए हम पर्यावरण मंत्रालय से अनुरोध करते हैं कि ईआईए अधिसूचना 2020 के मसौदे में प्रस्तावित संशोधनों को तुरंत वापस लें।
कोविड -1 योजना पर तभी पुनर्विचार करता है जब देश भर में स्वास्थ्य और नागरिक जीवन से जुड़ी स्थितियाँ सामान्य हो जाती हैं।
सुनिश्चित करें कि इस संशोधन के कार्यान्वयन पर व्यापक चर्चा हो और सूचना सार्वजनिक से उपलब्ध हो।
अंतिम संशोधन जारी होने से पहले प्राप्त टिप्पणियों की प्रकृति का पूर्ण प्रकटीकरण और इन टिप्पणियों को स्वीकार करने और अस्वीकार करने के कारण।
हमें उम्मीद है कि पर्यावरण मंत्रालय, ईआईए की अधिसूचना पर विचार करते हुए, 2020 में प्रस्तावित संशोधनों, रियो घोषणा के 10वें सिद्धांत और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से संबंधित सार्वजनिक भागीदारी के संबंध में अपने दायित्वों का ईमानदारी से पालन करेगा।
एक संबंधित नागरिक

EIA अधिसूचना २०२० चा मसुदा मागे घ्या [एफ. एन .२-५० / २०१८ / आयए.आयआय] आणि कोविड -२०१९ च्या साथीच्या प्रकाशात सार्वजनिक टिप्पण्यांची प्रक्रिया पुढे ढकलून द्या




C.K.Mishra
Secretary
Ministry of Environment, Forests and Climate Change
Indira Paryavaran Bhawan
Jor Bagh, New Delhi

विषयः EIA अधिसूचना २०२० चा मसुदा मागे घ्या [एफ. एन .२-५० / २०१८ / आयए.आयआय] आणि कोविड -२०१९ च्या साथीच्या प्रकाशात सार्वजनिक टिप्पण्यांची प्रक्रिया पुढे ढकलून द्या.
माननीय श्री मिश्रा,
हे EIAच्या अधिसूचना २०२० च्या मसुद्याच्या संदर्भात आहे जे पर्यावरण मंत्रालयाच्या संकेतस्थळावर १२.०३.२०२० रोजी अपलोड केले गेले असून अधिसूचना दिल्यानंतर साठ दिवसांच्या आत जनतेच्या मते जाणून घेतील. आम्हाला राष्ट्रीय आरोग्य संकटाच्या पार्श्वभूमीवर ही मसुदा अधिसूचना काढण्यात आल्याची तीव्र काळजी आहे. आपल्याला माहिती आहेच की, देशातील बहुतेक भाग लॉकडाऊन अंतर्गत आहे आणि सार्वजनिक ठिकाणी हालचालींवर कठोर निर्बंध आहेत. बहुतेक कार्यालये बंद आहेत आणि कर्मचारी घरून काम करत आहेत. हे निर्बंध अनिश्चित असू शकतात आणि सार्वजनिक जीवन आणि कार्य कधी सुरू होऊ शकते हे स्पष्ट नाही.
या जागतिक साथीच्या दीर्घकालीन सार्वजनिक आरोग्याचा, सामाजिक आणि आर्थिक परिणामांचा अद्याप पत्ता लागलेला नाही. EIA अधिसूचना हे एक महत्त्वपूर्ण नियम आहे ज्याद्वारे औद्योगिक आणि पायाभूत प्रकल्पांच्या भूमीचा वापर बदल, पाणी उपसा, वृक्षतोड, प्रदूषण, कचरा आणि सांडपाणी व्यवस्थापनावरील परिणामांचा अभ्यास करुन विकासात्मक निर्णय घेताना उपयोग केला जाईल. या कायद्यातील कोणत्याही बदलाचा थेट परिणाम लोकांच्या राहण्याची आणि काम करण्याच्या परिस्थितीवर आणि पर्यावरणावर होतो.
म्हणूनच, हे आवश्यक आहे की EIAच्या अधिसूचनेची आखणी आणि अंमलबजावणीमुळे प्रभावित झालेल्या लोकांसाठी योग्य आणि पुरेशी संधी सरकार पुरविते. प्रतिबंधित सार्वजनिक हालचाली, सामाजिक अंतर आणि दैनंदिन जीवनातील आव्हानांसह सध्याच्या आरोग्य आपत्कालीन परिस्थितीमुळे प्रस्तावित केलेल्या दुरुस्तीचे परिणाम समजून घेण्याची आणि त्यांच्यावरील चर्चा करण्याच्या संधींवर गंभीरपणे अडथळा आणू शकतात. या निर्बंधांमुळे ज्या समुदायांना अधिसूचना जाणून घेणे आणि त्याचा प्रभाव असणे आवश्यक आहे अशा लोकांकडे सूचनेविषयी माहिती प्रसारित करणे देखील अशक्य होते.
म्हणून आम्ही पर्यावरण मंत्रालयाला विनंती करतोः
तत्काळ, मसुदा EIA अधिसूचना २०२० मधील प्रस्तावित केलेल्या दुरुस्ती मागे घ्या.
कोविड -१ आरोग्य आणि नागरी जीवनाशी संबंधित आरोग्यविषयक परिस्थिती देशभर सामान्य झाल्यावरच आराखड्यास पुन्हा विचारात घ्या.
या दुरुस्तीच्या अंमलबजावणीवर व्यापक चर्चा आणि माहिती सार्वजनिक चर्चा झाल्याचे सुनिश्चित करा.
अंतिम दुरुस्ती जारी होण्यापूर्वी प्राप्त झालेल्या टिप्पण्यांचे स्वरूप आणि या टिप्पण्या स्वीकारण्यास व नाकारण्याचे कारण यांचे संपूर्ण खुलासे.
आम्ही आशा करतो की पर्यावरण मंत्रालय EIAच्या अधिसूचना, २०२० च्या प्रस्तावित सुधारणांबाबत विचारात घेत असताना रिओ घोषणेच्या सिद्धांत १० आणि नैसर्गिक न्यायाच्या तत्त्वांशी संबंधित असलेल्या माहितीनुसार सार्वजनिक सहभागाविषयी आपली जबाबदारी पाळेल.
प्रामाणिकपणे

োভিড-১৯ অতিমারির কারণে বিশ্ব জুড়ে জরুরি অবস্থা মাথায় রেখে ২০২০-র E.I.A. প্রজ্ঞাপনের খসড়া প্রত্যাহারের অনুরোধ




C.K.Mishra
Secretary
Ministry of Environment, Forests and Climate Change
Indira Paryavaran Bhawan
Jor Bagh, New Delhi

विषयः কোভিড-১৯ অতিমারির কারণে বিশ্ব জুড়ে জরুরি অবস্থা মাথায় রেখে ২০২০-র E.I.A. প্রজ্ঞাপনের খসড়া প্রত্যাহারের অনুরোধ
১২-ই মার্চ ২০২০ পরিবেশ মন্ত্রক E.I.A প্রজ্ঞাপনের একটি খসড়া আনয়ন করে এবং ৬০ দিনের ভিতর সেই সম্পর্কে জনগণের মতামত দাবি করে ।
১৯৯৪ সাল থেকে বিভিন্ন উন্নয়ন প্রকল্পের সামাজিক ও পরিবেশগত প্রভাব মূল্যায়নের আইনি মাধ্যম হিসেবে এই প্রজ্ঞাপন ব্যবহার হয়েছে । শুধু তাই নয়, শিল্প ও অবকাঠামো নির্মাণ বা সম্প্রসারণের ক্ষেত্রে জনমত গঠনের কাজেও বারবার ব্যবহার হয়েছে E.I.A প্রজ্ঞাপন ।
বিশ্বজুড়ে অর্থনৈতিক এবং স্বাস্থ্যব্যবস্থার জরুরী অবস্থা চলাকালীন এই প্রজ্ঞাপনের খসড়া সম্পর্কে জনমত জানতে চাওয়া মন্ত্রকের অবিবেচক ও অসংবেদী মনোভাবের প্রতিভাস মাত্র এবং নতুন সময়সীমা-ও অবস্থার উন্নতিসাধনে অসমর্থ । এতে আপনাদের সংস্থার অগ্রগণ্যতা সম্পর্কে আমাদের মনে গভীর সংশয় জন্মায় । প্রজ্ঞাপনটি জারি হওয়ার সময়-ই মার্কিন যুক্তরাষ্ট্র, ইওরোপ তথা ভারতবর্ষ জরুরি অবস্থার সম্মুখীন হয়ে পড়ে এবং কিছুদিনের মধ্যেই লকডাউন অবস্থার জেরে বিশ্বের আরও অনেক দেশের মতন ভারতে-ও সাধারণ জনজীবন ব্যাপকভাবে বিপর্যস্ত হয় ।
আজ-ও বেশীরভাগ দপ্তরেই তালা ঝুলছে এবং কর্মীদের বৃহদংশই বাড়িতে থেকে কর্মক্ষেত্রের দায়িত্বপালনে প্রচেষ্ট। এই অচলাবস্থার মেয়াদ নির্দিষ্ট নয় এবং পূর্বাবস্থা প্রত্যর্পণ করা কবে সম্ভবপর হবে তারও কোনো নিশ্চয়তা নেই । অর্থনৈতিক, সামাজিক তথা জনস্বাস্থ্যের উপর বিশ্ব জুড়ে ছড়িয়ে পড়া এই অতিমারির দীর্ঘমেয়াদী প্রভাব মূল্যায়ন করা এখনও সম্ভবপর হয়ে ওঠেনি । এই মুহূর্তে শহর-মফস্বলের সকলেই রোজকার প্রয়োজনীয় খাবার, উপার্জনের উপায় তথা নিজের মানসিক ও শারীরিক সুস্থতা বজায় রাখতেই ব্যস্ত ।
অথচ বহু ভুক্তভোগী মানুষের শেষ সম্বল এই E.I.A প্রবিধান যা প্রকল্প বিকাশকারীদের বাধ্য করে স্টেকহোল্ডারদের বিস্তারিত তথ্য বিশদে জানাতে ও কুপ্রভাব প্রশমিত করার তাদের দায়িত্ব আইনের আওতায় এনে ফেলে ।
এমতাবস্থায় আপনারা E.I.A. প্রজ্ঞাপনে প্রত্যাবর্তী বদল আনতে উদ্যোগী হয়ে ওঠেন, যখন কিনা আপনাদের জনমত গঠনের দাবির প্রতি ভ্রূক্ষেপ করার অবকাশই নেই আমাদের মতন সাধারণ মানুষের । ৩০-এ জুনের নতুন সময়সীমাও অন্যায্য এবং কখনোই সঠিক গণতন্ত্রের নিদর্শন নয় । বিশ্ব জুড়ে এই কঠিন সময় তথা করোনা ভাইরাসের সাথে যুঝতে থাকা লক্ষ মানুষের এই যন্ত্রণার মধ্যে পরিবেশগত ভবিষ্যত সম্পর্কে আমাদের উদ্বেগ বাড়িয়ে তোলা কি সঠিক মনুষ্যত্বের পরিচিয় ?
জনস্বার্থে এবং জনহিতকর পদক্ষেপ হিসেবে পরিবেশ মন্ত্রককে ২০২০-র এই E.I.A. প্রজ্ঞাপনের খসড়া অবিলম্বে প্রত্যাহার করার দাবি জানাই আমরা- সাধারণ মানুষ তথা দেশের আপামর জনসাধারণ ।
এই জরুরি অবস্থা পেছনে ফেলে পুনরায় জনজীবন সাধারণ হলে, আমরা আশাবাদী যে পরিবেশ মন্ত্রক এই সঙ্কটকালের শিক্ষা মাথায় রেখে E.I.A প্রজ্ঞাপনকে পরিবেশ শোষণের মাধ্যম করে তোলার বদলে পরিবেশ ও মানুষের অধিকার রক্ষার মাধ্যম হিসেবে আরও সুগঠিত ও শক্তিশালী করে তুলবে ।

ধন্যবাদান্তে ,

വിഷയം: കരട് EIA വിജ്ഞാപനം, 2020 [F.N.2-50 / 2018 / IA.III] പിൻവലിക്കുകയും കോവിഡ്-19 പകർച്ചവ്യാധിയുടെ വെളിച്ചത്തിൽ പൊതു അഭിപ്രായങ്ങളുടെ പ്രക്രിയ മാറ്റിവെക്കുകയും ചെയ്യുക




ബഹുമാനപ്പെട്ട ശ്രീ ജാവദേക്കർ ,
ഇക്കഴിഞ്ഞ 12.3.2020ന് കേന്ദ്ര പരിസ്ഥിതി മന്ത്രാലയം രാജ്യത്തെ പരിസ്ഥിതി ആഘാത പഠന നിയമത്തിൽ കാതലായ മാറ്റങ്ങൾ വരുത്തിക്കൊണ്ടും, ഈ വിഷയത്തിൽ അറുപതു ദിവസങ്ങൾക്കകം പൊതുജനാഭിപ്രായം രേഖപ്പെടുത്തുവാൻ ക്ഷണിച്ചുകൊണ്ടും ഒരു കരട് രേഖ പുറപ്പെടുവിക്കുകയുണ്ടായല്ലോ. ഇത്തരം രേഖകൾ 1994 മുതൽ രാജ്യത്തു നടപ്പിലാക്കുന്ന വികസന പദ്ധതികളുടെ സാമൂഹിക-പാരിസ്ഥിതിക ആഘാതങ്ങൾ നിയമപരമായി വിലയിരുത്തുന്നതിനും, വ്യവസായങ്ങളുടെയും അടിസ്ഥാന സൗകര്യങ്ങളുടെയും വികസനത്തിൽ പൊതുജനപങ്കാളിത്തം ഉറപ്പുവരുത്തുന്നതിനും ഏറെ സഹായകം തന്നെയാണ്.
പക്ഷെ, പൊതുജനാരോഗ്യ രംഗത്തും സാമ്പത്തിക രംഗത്തും ലോകം കടുത്ത പ്രതിസന്ധിയിൽ ആഴ്ന്നു നിൽക്കുന്ന ഈയവസരത്തിൽ, ഇത്തരമൊരു രേഖ പുറപ്പെടുവിക്കാനുള്ള തീരുമാനം അത്യന്തം അപലപനീയമാണെന്ന് അറിയിച്ചു കൊള്ളട്ടെ. അതോടൊപ്പം ഈ വിഷയത്തിൽ പൊതുജനാഭിപ്രായം രേഖപ്പെടുത്താൻ അനുവദിച്ചിട്ടുള്ള സമയപരിധി തീർത്തും അപര്യാപ്തമാണെന്നും സൂചിപ്പിച്ചുകൊള്ളട്ടെ. ഈ നടപടിയിൽ നിന്നും ഈ സർക്കാർ എന്തിനാണ് മുൻഗണന നൽകുന്നത് എന്ന തിരിച്ചറിവ് ഞങ്ങളെ അത്യന്തം ആശങ്കാകുലരാക്കുന്നു. ഈ നയരേഖ പ്രസിദ്ധപ്പെടുത്തുമ്പോൾ, അമേരിക്കയും യൂറോപ്പും ഇന്ത്യയുമെല്ലാം കോവിദഃ പകർച്ചവ്യാധിയെത്തുടർന്നു പൊതുജനാരോഗ്യ സംവിധാനത്തിനും സാമ്പത്തികരംഗത്തിനും ഏറ്റ അത്യന്തം ഗുരുതരമായ ആഘാതത്തെ നേരിടുകയായിരുന്നു. ഇതേതുടർന്ന്, ഇന്ത്യയടക്കമുള്ള രാജ്യങ്ങൾ നടപ്പിലാക്കിയ ലോക്ക്ഡൌൺ നയം മൂലം ജനങ്ങളുടെ സ്വതന്ത്ര സഞ്ചാര സ്വാതന്ത്ര്യവും തടസ്സപ്പെട്ടിരിക്കുകയാണ്.
പൊതുജനാരോഗ്യരംഗത്തും, സാമൂഹിക സാമ്പത്തിക രംഗത്തും ഈ പാകർച്ചവ്യാധി ഉളവാക്കാൻ പോകുന്ന ദൂരവ്യാപക പ്രത്യാഘാതങ്ങൾ ഇനിയും തിട്ടപ്പെടുത്തേണ്ടിയിരിക്കുന്നു. മിക്ക ഓഫീസുകളും അടച്ചുപൂട്ടിയിരിക്കുകയും, സാധ്യമായിടങ്ങളിലെല്ലാം അവിടങ്ങളിലെ ഉദ്യോഗസ്ഥർ വീട്ടിൽ ഇരുന്നുകൊണ്ട് തങ്ങളുടെ കൃത്യനിർവഹണം നിർവഹിക്കുകയുമാണ്. ഈ നിയന്ത്രണങ്ങൾ എന്ന് നീക്കപ്പെടും എന്നും, കാര്യങ്ങൾ എന്ന് പൂർവസ്ഥിതിയിലേക്കു വരുമെന്നും ആർക്കും ഒരുറപ്പുമില്ല. ഇപ്പോൾ ഗ്രാമ-നഗരഭേദമന്യേ ജനങ്ങളെല്ലാം തങ്ങളുടെ ഭക്ഷണത്തിന്റെയും വരുമാനത്തിന്റെയും, മാനസിക ശാരീരിക ആരോഗ്യത്തിന്റെയും സുരക്ഷ നിലനിർത്തുന്നതിൽ ശ്രദ്ധ കേന്ദ്രീകരിച്ചിരിക്കുകയാണ്.
ലോക്ക് ഡൌൺ മൂലം വ്യാവസായിക പ്രവർത്തനങ്ങൾ നിർത്തിവെച്ചിരിക്കുന്നത് കൊണ്ട് തന്നെ നഗരങ്ങളിലെ ശുദ്ധവായുവിന്റെ തോത് വർധിക്കുകയും നദികളെല്ലാം തന്നെ തെളിഞ്ഞൊഴുകുകയും ചെയ്യുന്നുണ്ട് എന്ന വസ്തുത തങ്ങൾക്കറിവുള്ളതാണല്ലോ. സാമ്പത്തിക-വ്യാവസായിക പ്രവർത്തനങ്ങളിൽ ഉപയോഗിക്കുന്ന രാസവസ്തുക്കളിൽ നിന്നും വായുവും വെള്ളവും മലിനമാവുന്നതു തടയാൻ നിലവിലുള്ള ഔദ്യോഗിക സംവിധാനം എത്രത്തോളം അപര്യാപ്തമാണെന്ന് ഇത് കാണിക്കുന്നു. ഇതേ അവസരത്തിൽ, വാർത്തകളിൽ ഞങ്ങൾ കാണുന്നത്, താങ്കളുടെ മന്ത്രാലയം നിരവധിയായ ഖനന, വ്യാവസായിക, നിർമാണ, റോഡ് പദ്ധതികൾക്ക് തലങ്ങും വിലങ്ങും അനുമതി നൽകുന്നതാണ്. ഇത് കൂടുതൽ കാടുകൾ നശിപ്പിക്കാനും, ജലസ്രോതസ്സുകൾ മലിനപ്പെടുത്താനും, കൃഷിഭൂമിയും പൊതുവിടങ്ങളും തീരപ്രദേശങ്ങളും കയ്യേറ്റം ചെയ്യപ്പെടാനും മാത്രമേ ഇടനൽകുകയേയുള്ളൂ. പാരിസ്ഥിതിക ആഘാത പഠന നിയമം പോലുള്ള പാരിസ്ഥിതിക നിയമങ്ങൾ ഉപയോഗിച്ചാണ് തങ്ങൾ ഇക്കണ്ട പരിസ്ഥിതിനാശത്തിനെല്ലാം വഴിതുറക്കുന്നത് എന്നതാണ് ഏറെ വിചിത്രം.
അപ്പോഴും, ഇത്തരം പദ്ധതികളുടെ ആഘാതം ഏൽക്കുന്ന ജനങ്ങളെ സംബന്ധിച്ചിടത്തോളം പരിസ്ഥിതി ആഘാത പഠന നിയമത്തിന്റെ ചട്ടക്കൂടാണ്, ഈ പദ്ധതികളെ സംബന്ധിച്ച ശരിയായ വിവരങ്ങൾ അവയുടെ നടത്തിപ്പുകാർ വെളിവാക്കുന്നു എന്നും, നിയമപരമായ വ്യവസ്ഥകൾ പാലിക്കുന്നുണ്ട് എന്നും ഉറപ്പു വരുത്താനുള്ള ഏക മാർഗം.
അങ്ങനെയിരിക്കെയാണ്, ജനങ്ങൾക്ക് പ്രതികരിക്കാൻ പോലും പറ്റാത്ത ഒരവസരത്തിൽ, പാരിസ്ഥിതിക ആഘാത പഠന നിയമത്തിൽ തികച്ചും പ്രതിലോമകരമായ മാറ്റങ്ങൾ വരുത്താനുള്ള താങ്കളുടെ നീക്കം. പുതുതായി നീട്ടിയ ജൂൺ 30 എന്ന സമയപരിധി പോലും ഇക്കാര്യത്തിൽ തികച്ചും അപര്യാപതമാണ്. താങ്കളുടെ ഈ നീക്കം എത്രത്തോളം ജനാധിപത്യപരവും നീതിയുക്‌തവുമാണ്? പകർച്ചവ്യാധിയെയും, സാമ്പത്തിക പ്രതിസന്ധിയെയും, ജനലക്ഷങ്ങളുടെ വ്യാപകമായ ദുരിതത്തെയും രാജ്യം നേരിട്ടുകൊണ്ടിരിക്കുമ്പോൾ, ഇത്തരം ഒരു നടപടിയുമായി മുന്നോട്ടു പോകുന്നത് മനുഷ്യത്വപരമാണോ?
അത് കൊണ്ട്, പൊതുതാൽപ്പര്യം മുൻനിർത്തി പാരിസ്ഥിതിക ആഘാത പഠനത്തിൽ വരുത്താൻ ഉദ്ദേശിക്കുന്ന മാറ്റങ്ങൾ രേഖപ്പെടുത്തിക്കൊണ്ടുള്ള കരട് രേഖ പരിസ്ഥിതി മന്ത്രാലയം അടിയന്തിരമായി പിൻവലിക്കണമെന്ന് ഇന്നാട്ടിലെ പൊതുജനങ്ങളായ ഞങ്ങൾ ആവശ്യപെടുന്നു.
ഒരു പക്ഷെ ഈ പകർച്ചവ്യാധിക്കാലം പിന്നിട്ടുകഴിയുമ്പോൾ, അതിൽ നിന്നും ഒരു പാഠം പഠിച്ചുകൊണ്ടു, വിനാശോന്മുഖമായ ഇപ്പോഴത്തെ വികസനനയങ്ങൾ കൈവിട്ടുകൊണ്ട്, താങ്കളുടെ മന്ത്രാലയം സമൂഹത്തിന്റെ എല്ലാ തട്ടിലുള്ളവരെയും പ്രകൃതിയെയും ഒരു പോലെ സംരക്ഷിക്കുന്ന രീതിയിലുള്ള മാറ്റങ്ങൾ പാരിസ്ഥിതിക നിയമങ്ങളിൽ വരുത്തുമെന്നാണ് ഞങ്ങളുടെ പ്രതീക്ഷ.
നന്ദിയോടെ

கோவிட்-19 தொற்றுநோயின் வெளிச்சத்தில் 2020 வரைவு EIA அறிவிப்பை திரும்பப் பெறுவதற்காந கோரிக்கை




அன்புள்ள திரு ஜாவேட்கர்.
சுற்றுச்சூழல் அமைச்சகம் 12.3.2020 அன்று சுற்றுச்சூழலின் மீதான தாக்க மதிப்பீடு குறித்த வரைவு அறிவிக்கை ஒன்றை வெளியிட்டுள்ளது. வெளியான நாற்பது நாட்களுக்குள் பொதுமக்கள் கருத்துகளைத் தெரிவிக்க வேண்டும் என்றும் கோரியுள்ளது. இந்த அறிவிக்கை தான் 1994 ஆண்டில் இருந்து அமலில் உள்ளது. வளர்ச்சி திட்டங்கள் சமூகத்திலும், சுற்றுச்சூழலிலும் செலுத்தும் தாக்கத்தைச் சட்ட ரீதியாக அளவிட உதவும் முக்கியமான கருவியாக உள்ளது. மேலும், நாட்டினில் தொழிற்சாலை, உட்கட்டமைப்புத் திட்டங்களைத் துவங்குவதற்கும், விரிவுபடுத்துவதற்கும் முன்னால் பொதுமக்களின் பங்கேற்பினை நிகழ்த்த இந்த அறிவிக்கை உதவி வருகிறது.
உலகளவில் பெரும் பொருளாதார, பொதுச் சுகாதார அவசரநிலை நிலவி கொண்டிருக்கும் இக்காலத்தில் இத்தகைய வரைவு அறிவிக்கையை அமைச்சகம் வெளியிட்டிருப்பது திகைப்பூட்டுகிறது.தற்போது நீட்டிக்கப்பட்டிருக்கும் காலக்கெடு கூட எந்த மாற்றத்தையும் சாதிக்கப்போவதில்லை. இத்தகைய செயல்பாடுகள் உங்களுடைய முன்னுரிமைகள் தான் என்ன என்று எங்களைக் கவலைகொள்ள வைக்கிறது. பொருளாதார மந்தநிலை மட்டுமல்லாமல் பொதுச் சுகாதார முறை பாரம் தாங்க இயலாமல் தள்ளாடிக் கொண்டிருக்கும் அவலநிலையோடு அமெரிக்கா, ஐரோப்பா , இந்தியா முதலிய பகுதிகள் பதற்றத்தோடு போராடிக் கொண்டிருக்கின்றன. இத்தகைய சூழலில், இந்த வரைவு அறிவிக்கை வெளியிடப்பட்டது. இது நிகழ்ந்த பின்பு, வெகு விரைவில் இந்தியா உள்ளிட்ட பெரும்பாலான நாடுகள் பொது முடக்கத்தைக் கைக்கொண்டன. மக்கள் பொது இடங்களில் புழங்குவதை வெகுவாக மட்டுப்படுத்தும் நோக்கில் பல்வேறு கட்டுப்பாடுகள் விதிக்கப்பட்டன.
.இப்போதும் பல்வேறு அலுவலகங்கள் மூடி கிடப்பதோடு, அவர்களின் ஊழியர்கள் வீட்டில் இருந்தே வேலை பார்க்கிறார்கள். இந்தக் கட்டுப்பாடுகள் காலவரையின்றித் தொடரக்கூடும். பொது வாழ்க்கையும், மக்கள் வேலைக்குச் செல்லக்கூடிய இயல்புநிலையும் எப்போது திரும்பும் என்கிற தெளிவில்லை. பொதுச் சுகாதாரம், சமூகம், பொருளாதாரம் ஆகியவற்றில் இந்த உலகப் பெருந்தொற்று நீண்ட காலத்தில் எத்தகைய தாக்கங்களை ஏற்படுத்தும் என்று தெளிவாகத் தெரியவில்லை. இப்போதைக்கு, நகர்ப்புறம் மற்றும் ஊரகப் பகுதிகளில் மக்கள் உணவுக்காகவும், வேலை வாய்ப்புக்காகவும் போராடிக் கொண்டிருக்கிறார்கள். வருமானத்தையும், மனநலத்தையும் தற்காத்துக் கொள்வதிலேயே அவர்களின் காலம் கழிகிறது.
இந்தப் பொது முடக்கக் காலத்தில், பல்வேறு செயல்பாடுகள் நின்று போன நிலையில் பல்வேறு பெருநகரங்களில் காற்றின் தூய்மை கூடியிருக்கிறது. பாயும் நதிகள் ஒப்பீட்டளவில் சுத்தமாக, சுதந்திரமாகப் பாய்கின்றன. இது தொழிற்சாலைகள், மனித செயல்பாடுகளை நெறிப்படுத்தும் உங்களுடைய முறையானது வேதி நச்சுகளில் இருந்து காற்றையும், நீரையும் காக்க தவறிவிட்டதைத் தெளிவாக உணர்த்தியிருக்கும். செய்திக் கட்டுரைகளில் இருந்து, அமைச்சகமானது பல்வேறு சுரங்கப்பணிகள், புதிய தொழிற்சாலைகள், பெரும் கட்டுமானங்கள், கூடுதல் நெடுஞ்சாலைகளுக்கு அனுமதி வழங்கி தள்ளுகிறது என்று அறிகிறோம். இன்னமும் வனங்களை அழிப்பதோடு, நீர் நிலைகளை மாசுபடுத்தும். மேலும், விவசாய நிலங்கள், பொதுவெளிகள், கடலோரப் பகுதிகள் ஆகியவை கூடுதலாக ஆக்கிரமிக்கப்படும். இதனை எல்லாம் சுற்றுச்சூழலின் மீதான தாக்க மதிப்பீடு அறிவிக்கை மற்றும் இன்னபிற சுற்றுச்சூழல் சட்டங்களின் மூலம் அரங்கேற்றிக் கொண்டிருக்கிறீர்கள்.
எனினும், இந்தச் சுற்றுச்சூழலின் மீதான தாக்க மதிப்பீடு தான் செயல்திட்ட வடிவமைப்பு, அதன் தாக்கங்கள் குறித்த தகவல்களைச் செயல்திட்டங்களை நடைமுறைப்படுத்துபவர்களிடம் இருந்து பெறுவதற்குப் பல்லாயிரக்கணக்கான பாதிக்கப்பட்ட மக்களுக்கு இருக்கும் ஒரே வழிமுறையாகும். இந்த அறிவிக்கையின் மூலம் தான், செயல்திட்டங்களால் ஏற்படும் பாதிப்புகளை மட்டுப்படுத்துவதோடு, சட்ட பாதுகாப்புகளுக்கு இணங்க நடந்து கொள்வதையும் உறுதி செய்ய வேண்டிய கட்டாயம் சாத்தியப்பட்டிருக்கிறது. .
இந்த அறிவிக்கை குறித்துக் கருத்துத் தெரிவியுங்கள் என்று நாங்கள் எதிர்வினை ஆற்ற இயலாத காலத்தில் அறிவித்து இருப்பதோடு, அறிவிக்கையில் பிற்போக்கான மாற்றங்களைக் கொண்டுவர பரிந்துரை வேறு செய்து உள்ளீர்கள். இப்போது காலக்கெடுவை ஜூன் 30 என்று நீட்டித்து இருப்பது கூடப் போதாது. இது தான் ஜனநாயகத்தன்மையா? இது நியாயமா? கொரோனா வைரஸ் தொற்றில் சிக்கிக்கொண்டு, பொது முடக்கத்திற்கு ஈடுகொடுக்க முடியாமல் பல கோடி மக்கள் அல்லாடிக் கொண்டிருக்கும் காலத்தில் சுற்றுச்சூழலின் எதிர்காலம் குறித்து எங்களை மேலும் பதற வைக்கும் இத்தகைய செயல்களை முன்னெடுப்பது மனிதத்தன்மையற்ற ஒன்றல்லவா?
பொதுமக்களாகிய நாங்கள், இந்தச் சுற்றுச்சூழலின் மீதான தாக்க மதிப்பீடு வரைவு அறிவிக்கை,2020 -னை பொதுநலன் கருதி சுற்றுச்சூழல் அமைச்சகம் திரும்பப் பெற வேண்டும் என்று கேட்டுக்கொள்கிறோம்.
நம்மைக் கோவிட் அவசரநிலை சூழ்ந்திருக்கும் நிலையில், தற்போதைய ஆபத்துமிக்க வளர்ச்சி முறைகளை நியாயப்படுத்த முனையாமல், இந்த இடரில் இருந்து சுற்றுச்சூழல் அமைச்சகம் பாடம் படித்து, மக்களுக்கும், இயற்கைக்கும் வழங்கவேண்டிய சுற்றுச்சூழல், சமூகப் பாதுகாப்பு ஆகியவற்றை உறுதி செய்யும் வகையில் சுற்றுச்சூழலின் மீதான தாக்க மதிப்பீடு அறிவிக்கையில் மாற்றங்களைக் கொண்டு வரும் என்று நம்புகிறோம்.
நன்றி,

মহামাৰী ক'ভিড ১৯ ৰ সময়চোৱাত EIA নটিফিকেচন ২০২০ খচৰাখন প্ৰত্যাহাৰ কৰিবলৈ অনুৰোধ জনালোঁ।




শ্ৰদ্ধাৰ মি: জাভাডেকাৰ,
পৰিৱেশ মন্ত্ৰনালয়ে EIA, ২০২০ নটিফিকেচনৰ খচৰা এখন প্ৰস্তুত কৰিছে আৰু ছয়দিনৰ ভিতৰত জনসাধাৰণৰ পৰা মন্তব্য বিচাৰিছে। ১৯৯৪ চনৰ পৰা এই নটিফিকেচনখন প্ৰকল্প এটাৰ দ্বাৰা সমাজ আৰু পৰিৱেশৰ ওপৰত পৰিব পৰা প্ৰভাৱৰ বৈধ মূল্যায়ন কৰিবলৈ অতি গুৰুত্ত্বপূৰ্ণ আহিলাৰূপে পৰিগণিত হৈছে তথা দেশত উদ্যোগ অথবা ইফৰাষ্ট্ৰাকচাৰ স্থাপন কৰাৰ আগতে ই জনসাধাৰণৰ অংশগ্ৰহণ কৰাত সহায় কৰিছে।
বিশ্ব-অৰ্থনীতি আৰু জনস্বাস্থ্যৰ জৰুৰীকালীন অৱস্থাত মন্ত্ৰনালয়ে এই খচৰাখন জনসাধাৰণৰ মন্তব্যৰ বাবে প্ৰস্তুত কৰা কাৰ্যটো অতি আতংকজনক। আনকি, নতুন ডেডলাইনেও একো পাৰ্থক্য দেখুওৱা নাই। এইটোৱে আমাৰ মাজত আপোনালোকৰ অগ্ৰাধিকাৰৰ প্ৰতি উদ্বেগৰ সৃষ্টি কৰিছে। যেতিয়া এই নটিফিকেচনখন ওলায়, আমেৰিকা, ইউৰোপ আৰু ভাৰতত ইতিমধ্যেই এই জৰুৰীকালীন পৰিস্থিতিৰ ওপৰত নজৰ দিছে। তাৰপিছত, তলাবন্ধই সমগ্ৰ পৃথিৱীত প্ৰভাৱ পেলোৱাৰ ফলত জনসাধাৰণৰ আন্দোলন বাধাগ্ৰস্ত হৈছে।
বৰ্তমান প্ৰায় সকলোবোৰ কাৰ্যালয়েই বন্ধ আৰু কৰ্মচাৰীসকল ঘৰৰ পৰাই অফিচৰ কাম কৰি আছে। আজিৰ তাৰিখতো কোনেও ক'বলৈ পৰা নাই এইবোৰ কেতিয়া শেষ হ'ব। এই মহামাৰীয়ে জনস্বাস্থ্য, সমাজ আৰু অৰ্থনীতিত কেনেধৰণৰ প্ৰভাৱ পেলাব সেইটো অজান। এই মুহূৰ্তলৈ গাঁও, চহৰৰ সকলো মানুহেই খাদ্য, কৰ্ম, উপাৰ্জন আৰু শাৰীৰিক তথা মানসিকস্বাস্থ্য ঠিকমতে ৰখাত গুৰুত্ব দি আছে।
আপুনি নিশ্চয় মন কৰিছে, তলাবন্ধই ডাঙৰ ডাঙৰ চহৰবোৰত বায়ু প্ৰদূষণ যথেষ্ট পৰিমানে কমাইছে আৰু নদীৰ পানী চাফা আৰু পৰিষ্কাৰ হৈছে। ইয়াৰ পৰা এইটোৱেই বুজা যায় যে উদ্যোগ আৰু মানুহৰ কাৰ্যকলাপে পৰিৱেশ প্ৰদূষণ হোৱাত যথেষ্ট অৰিহণা যোগায়। তদুপৰি, খবৰ কাগজৰ পৰা আমি জানিবলৈ পাইছোঁযে মন্ত্ৰনালয়ে আজিকোপতি কয়লাখনন, উদ্যোগ স্থাপন, ডাঙৰ ডাঙৰ নিৰ্মাণকাৰ্য, হাইৱে নিৰ্মাণ ইত্যাদিৰ অনুমোদন দি আছে, যিবোৰে পাব্লিক ঠাই, উপকূলীয় এলেকা ইত্যাদি দখল কৰিব, অৰণ্য ধ্বংস কৰিব। আপোনালোকে এই EIA নটিফিকেচন আৰু অন্যান্য পৰিৱেশ আইনৰ সহায়ত এইবোৰ কৰে আছে।
আজিৰ তাৰিখলৈকে বহু সংখ্যক ক্ষতিগ্ৰস্তলোকৰ বাবে এই EIA প্ৰবিধানখন মাথোঁ প্ৰকল্প বিকাশকাৰীসকলে দেখুওৱা প্ৰকল্প এটাৰ ডিজাইন, প্ৰভাৱ নিৰ্ধাৰণৰ এক পদ্ধতি আৰু যিয়ে প্ৰতিকূল প্ৰভাৱ নাইকিয়া কৰিবলৈ প্ৰকল্প এটা বৈধভাৱে বাধ্যতামূলক কৰে আৰু নিৰাপত্তা বেষ্টনী সুনিশ্চিত কৰে।
কিন্তু এনেকুৱা পৰিস্থিতিত য'ত আমি জনসাধাৰণৰ মতামতৰ বাবে আগবাঢ়ি আহিবলৈ অক্ষম, আপুনি এই সময়ত EIA নটিফিকেচনখন প্ৰত্যাবৰ্তনৰ বাবে প্ৰস্তাৱ আগবঢ়াইছে। আনকি, নতুন ডেডলাইন ৩০ জুন অগ্ৰহনীয়। এয়াই নেকি গণতন্ত্ৰবাদ? এয়া অমানৱীয়তা নহয়নে য'ত আমি ক'ৰণা ভাইৰাছ, তলাবন্ধৰ পৰিস্থিতিত আমি সকলোৱে সংগ্ৰাম কৰি আছোঁ আৰু বহুতো এই বেমাৰত আক্ৰান্ত, তেনে অৱস্থাত এইবোৰলৈ আমাক আৰু অধিক উদ্বেগজনক পৰিস্থিতিত পেলাইছে?
জনগণৰ স্বাৰ্থত, আমি, জনসাধাৰণে পৰিৱেশ মন্ত্ৰনালয়ক দাবী জনাওঁযে অনতিপলমে এই EIA নটিফিকেচন ২০২০ খচৰাখন পৰিহাৰ কৰক।
আমি আশা কৰোঁ যে, যেতিয়া এই ক'ভিড-১৯ ৰ জৰুৰীকালীন অৱস্থাৰ শাম কাটিব, তেতিয়া পৰিৱেশ মন্ত্ৰনালয়ে ক্ষতিকাৰক উন্নয়ন প্ৰকল্প এটাক নায্যতা প্ৰদান কৰাৰ পৰিৱৰ্তে EIA নটিফিকেচনখনলৈ সংশোধনী আনিব যিখনে পৰিৱেশ তথা সামাজিক সুৰক্ষাৰ বাট কটকটীয়া কৰি তুলিব।
ধন্যবাদ আৰু শুভেচ্ছা সহকাৰে,

કોવિડ-19 મહામારીને ધ્યાનમાં રાખી પર્યાવરણીય અસર અહેવાલ (EIA) નોટિફિકેશન 2020 રદ્દ કરવા વિનંતી




શ્રીમાન જાવડેકર જી,
ભારત સરકારના પર્યાવરણ મંત્રાલયે 12.3.2020 ના રોજ EIA નોટિફિકેશન 2020નો ડ્રાફ્ટ રજૂ કર્યો હતો અને તે વિશે આ તારીખથી સાઠ દિવસની અંદર લોકોની ટિપ્પણી માંગી હતી. 1994થી, વિકસિત પ્રોજેક્ટ્સના સામાજિક અને પર્યાવરણીય પ્રભાવોની કાયદાકીય આકારણી માટે અને દેશમાં ઔદ્યોગિક અને માળખાગત પ્રોજેક્ટ્સની સ્થાપના અથવા વિસ્તરણ પહેલાં લોકોની ભાગીદારીના આયોજન માટે, આ સૂચના એક મહત્વપૂર્ણ સાધન છે.
તે આશ્ચર્યજનક બાબત છે કે વૈશ્વિક સ્તરે આર્થિક અને જાહેર આરોગ્યની કટોકટીની વચ્ચે મંત્રાલયે જાહેર ટિપ્પણીઓ માટેનો ડ્રાફ્ટ જાહેર કર્યો છે. નવી મુદતથી પણ કોઈ ફરક પડવાનો નથી. આ અમને તમારી પ્રાથમિકતાઓ અમારા માટે ચિંતાજનક છે. જ્યારે આ જાહેરનામું બહાર પાડવામાં આવ્યું ત્યારે, યુ.એસ., યુરોપ અને ભારત આર્થિક મંદીના સંયુક્ત પ્રભાવો અને જાહેર પ્રણાલી પર મોટાપાયે બોજને લીધે પહેલેથી જ ભયજનક પરિસ્થિતિ તરફ ધ્યાન આપી રહ્યા હતા. પછી તરત જ, આપણા દેશ સહિત મોટાભાગના દેશોમાં લોકડાઉન લાગુ કરવામાં આવ્યું , જેની હેઠળ જાહેર સ્થળોએ લોકોની અવરજવર પર ભારે પ્રતિબંધો લાદવામાં આવ્યા.
આજે મોટાભાગની ઓફિસો પણ બંધ છે અને સ્ટાફ ઘરેથી કામ કરી રહ્યો છે. આ પ્રતિબંધો અનિશ્ચિત સમય સુધી હોઈ શકે છે અને જાહેર જીવન અને કાર્ય પહેલાંની જેમ ક્યારે ફરી શરૂ થઈ શકશે તે સ્પષ્ટ નથી. આ વૈશ્વિક રોગચાળાની અસર હેઠળ લાંબા ગાળાના જાહેર આરોગ્ય, સામાજિક અને આર્થિક પ્રભાવો વિશે હજી પૂરતી જાણ નથી . અત્યારે, શહેરી અને ગ્રામીણ વિસ્તારોના મોટાભાગના લોકો ફક્ત ખોરાક, નોકરીઓ, આવક અને માનસિક અને શારીરિક સ્વાસ્થ્યના સંચાલનમાં સંપૂર્ણ રીતે ઘેરાયેલા છે.
જેમ તમે કદાચ સમજી ગયા હશો કે, આ લોકડાઉન દરમિયાન ઘણી પ્રવૃત્તિઓ બંધ કરવાથી મોટા શહેરોમાં હવાની ગુણવત્તામાં સુધારો થયો છે અને નદીઓ પ્રમાણમાં સ્વચ્છ અને મુક્ત વહી રહી છે. આ તમારે જોવું જોઈએ કે ઔદ્યોગિક અને માનવ પ્રવૃત્તિને નિયંત્રિત કરવાની તમારી સિસ્ટમ આપણા હવા અને પાણીને રાસાયણિક ઝેરથી બચાવવામાં નિષ્ફળ ગઈ છે. સમાચાર લેખનો દ્વારા અમે એ પણ જાણીએ છીએ કે મંત્રાલય હજી વધુ ખાણકામ, વધુ ઉદ્યોગો, વધુ જંગી બાંધકામો અને વધુ રાજમાર્ગોને મંજૂરી આપી રહ્યું છે. જે વધુ જંગલોનો નાશ કરશે, પાણીના વધુ સ્ત્રોતોને પ્રદૂષિત કરશે, વધુ ખેતીની જમીન, જાહેર જગ્યા અને દરિયાકાંઠાના વિસ્તારોનો કબજો કરશે. તમે EIA સૂચનો અને અન્ય પર્યાવરણીય કાયદાઓનો ઉપયોગ કરીને આ કરી રહ્યા છો.
છતાં ઘણા અસરગ્રસ્ત લોકો માટે, EIA નિયમન એ ખાતરી કરવાની એક માત્ર પદ્ધતિ છે કે પ્રોજેક્ટ વિકાસકર્તાઓ પ્રોજેક્ટ ડિઝાઇન અને અસરોની વિગતો જાહેર કરે અને આ પ્રોજેક્ટ્સને અસર ઘટાડવા અને કાનૂની સલામતીનું પાલન કરવું કાયદેસર રીતે ફરજિયાત છે.
હવે તમે EIA સૂચનો માં એવા સમયે પ્રતિક્રિયાશીલ ફેરફારો કરવાની દરખાસ્ત કરો જ્યારે અમે જાહેર ટિપ્પણીઓ માટે તમારા જવાબ આપી શકતા નથી. 30 જૂનની નવી અંતિમ તારીખ પણ અયોગ્ય છે. શું આ જ લોકશાહી છે? શું આ યોગ્ય છે? જ્યારે આપણે આ કોરોના વાયરસ, આ લોકડાઉન અને આપણા લાખો લોકોના દુ:ખોનો સામનો કરવા માટે ઝઝૂમી રહ્યા છીએ ત્યારે આપણા પર્યાવરણીય વાયદા વિશે આપણને વધુ ચિંતા કરવા શું માનવીય છે?
જાહેર હિતમાં, અમે, જાહેર જનતા, પર્યાવરણ મંત્રાલયને તાત્કાલિક ડ્રાફ્ટ EIA સૂચના 2020 પાછો ખેંચવાની માંગણી કરીએ છીએ.
અમે આશા રાખીએ છીએ કે જ્યારે આ COVID ઇમરજન્સી આપણા બધાની માથે છે, ત્યારે પર્યાવરણ મંત્રાલય કટોકટીમાંથી શીખશે અને EIA સૂચનો માં સુધારા લાવશે જે હાલના સ્વરૂપોને યોગ્ય ઠેરવવાને બદલે તમામ લોકો અને પ્રકૃતિના પર્યાવરણીય અને સામાજિક સુરક્ષાની ભૂમિકાને મજબૂત કરશે. હાનિકારક વિકાસ.
આભાર

کووڈ-19 کے زیر نظر ، ای آئی اے(EIA) اطلاع ڈرافٹ ،2020 کو واپس لینے کی گذارش.




کووڈ-19 کے زیر نظر ، ای آئی اے(EIA) اطلاع ڈرافٹ ،2020 کو واپس لینے کی گذارش.
جناب پرکاش جاوڑیکروزیر ماحولیات، جنگلات اور موسمیاتی تبدیلی
اِندرا پریاورن بھون
جور باغ، نئ دہلی.
جناب جاوڑیکر صاحب
آپکی وزارت نے ای آئی اے (EIA) طلاع ڈرافٹ 2020 بتاریخ 12.03.2020 کو شائع کرکےاس تاریخ سے 60 دن کے اندر عوام سے تجاویز طلب کی تھیں. سال 1994 سے ایسی اطلاع ملک میں ترقی یافتہ منصوبوں کا سماجی اور ماحولیاتی تعثر سمجھنے اور انکی قانونی تعین جانچنے میں بہت کارآمد رہی ہیں اور عوام ان صنعتی منصوبوں کے عمل میں آنے سے قبل اس میں تعاون کرسکتی ہے.
یہ بہت ہی افسوسناک ہے کہ آپکی وزارت نے یہ ڈرافٹ اطلاع جب عوام کی تجاویز کے لئے شائع کی تب پوری دنیا مالی نقصان اور وباء میں مبتلا تھی. ایسے میں ہمیں یہ بات بےحد فکر مند کر رہی ہے کہ آپکے لئے کیا اہم ہے. جب یہ اطلاع شائع ہوئی تو امریکہ، یورپ اور ہندوستان کی معاشی حالت اچھی نہیں تھی اور لوگ بھی بےحد پریشان تھےجلد ہی ہندوستان اور کئ ممالک نے لاکڈاؤن کردیا جس سے لوگوں کا گھروں سے باہر نکلنا بند ہوگیاآج بھی بیشتر دفاتر بند ہیں اور عملہ گھر سے کام کر رہا ہے۔ یہ پابندیاں غیر معینہ مدت کے لئے ہوسکتی ہیں اور یہ واضح نہیں ہے کہ کب عوامی زندگی اور کام پہلے کی طرح دوبارہ شروع ہوسکتے ہیں۔ اس عالمی وبائی بیماری کے مستقبل میں عوامی صحت ، معاشرتی اور معاشی اثرات ابھی تک معلوم نہیں ہیں۔ ابھی ، شہری اور دیہی دونوں علاقوں میں زیادہ تر لوگ صرف کھانا ، ملازمت ، آمدنی اور ذہنی اور جسمانی صحت کا انتظام کرنے میں پوری طرح قابض ہیں۔

جیسا کہ آپ نے محسوس کیا ہوگا ، اس لاک ڈاؤن کے دوران بہت سی سرگرمیاں بند ہونے سے بڑے شہروں میں ہوا کا معیار بہتر ہوا ہے اور دریا نسبتاً صاف اور آزاد بہہ رہے ہیں۔ یہ آپ کو دکھارہاہے کہ آپ کا صنعتی اور انسانی سرگرمیوں کو قابو کرنے کا نظام ہماری ہوا اور پانی کو کیمیائی زہر سے بچانے میں ناکام رہا ہے۔ خبروں کے مضامین سے ، ہم یہ بھی جانتے ہیں کہ وزارت اب بھی زیادہ کان کنی ، مزید صنعتوں ، زیادہ کبیرہ تعمیرات اور مزید شاہراہوں کو منظوری دے رہی ہے۔ اس سے مزید جنگلات تباہ ہوجائیں گے ، پانی کے مزید ذرائع آلودہ ہوں گے ، زیادہ کھیتوں ، عوامی جگہوں اور ساحلی علاقوں پر قبضہ ہوگا۔ آپ ای آئی اے نوٹیفکیشن اور دیگر ماحولیاتی قوانین کا استعمال کرکے ایسا کر رہے ہیں۔پھر بھی متعدد متاثرہ افراد کے لئے ، ای آئی اے کا ضابطہ واحد ذریعہ رہگیا ہے تاکہ یہ یقینی بنایا جا سکے کہ پروجیکٹ ڈویلپرز منصوبے کے ڈیزائن اور اثرات کی تفصیلات ظاہر کریں اور ان منصوبوں کو قانونی طور پر اثرات کو کم کرنے اور قانونی حفاظتی اقدامات پر عمل پیرا ہونے کا پابند کیا جائے۔

اب آپ ای آئی اے کی اطلاع میں ایک ایسے وقت میں رجعت پسند تبدیلیاں کرنے کی تجویز کررہے ہیں جب ہم عوامی تبصرے کے لئے آپ کے سوال کا جواب نہیں دے سکتے ہیں۔ یہاں تک کہ 30 جون کی نئی حد بھی غیر منصفانہ ہے۔ کیا یہ جمہوری ہے؟ کیا یہ سہی ہے؟ کیا جب ہم اس کورونا وائرس ، اس لاک ڈاؤن اور اپنے لاکھوں لوگوں کی پریشانیوں سے نمٹنے کے لئے جدوجہد کر رہے ہیں تو اپنے ماحولیاتی مستقبل کے بارے میں ہمیں اور مزید پریشان کرنا انسانیت کے معیار پر سہی بات ہے؟عوامی مفاد کے لئے، ہم، عوام، وزارت ماحولیات سے مطالبہ کرتے ہیں کہ وہ ڈرافٹ ای آئی اے نوٹیفکیشن 2020 کو فوری طور پر واپس لیں۔
ہم امید کرتے ہیں کہ جب یہ

COVID ہنگامی حالت ہم سب کے پیچھے ہے تو ، وزارت ماحولیات اس بحران سے سبق حاصل کرے گی اور ای آئی اے نوٹیفکیشن میں ایسی ترامیم لائے گی جو اس موجودہ نقصان دہ ترقی کو جواز بنانے کی بجائے ماحول اور معاشرتی تحفظ
کے کردار کو مستحکم بنائے گی۔شکریہ.